मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

ग़ज़ल

जीवन मेरा, प्यार तुम्हारा,
मुझपर है अधिकार तुम्हारा।

बस, अब तो हो जाओ राज़ी,
वो मेरा, संसार तुम्हारा।

मैं तो सच की राह चलूँगा,
झूठ भरा घर-बार तुम्हारा।

सुख दो, दुख दो, सब सर माथे,
जो कुछ है, स्वीकार तुम्हारा।

क्यों काँटों जैसा लगता है,
मुझपर हर उपकार तुम्हारा।

ठेठ निकम्मे हो, फिर कैसे-
सपना हो साकार तुम्हारा।

मां मैं कब से सोच रहा हूँ,
कैसे उतरे भार तुम्हारा।

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

अगर चिराग है तो जल......

अगर चिराग है तो जल तू आँधियों के सामने
अगर हँसी है तो हरेक लबके हाथ थाम ले।

अगर है होंसला तो हर कदम-कदम के साथ चल,
रुकावटें करेंगी क्या अगर इरादे हैं अटल,
जिधर-जिधर मुड़ेगा तू, उधर मुडेंगे रास्ते।
अगर चिराग है तो जल तू आँधियों के सामने।

अगर तू कान है तो दर्द सुन यहाँ हरेक का,
अगर तू आँख है तो दिक्क़तों का कर मुआयना,
अगर ज़बान है तो सामने जहाँ के बोल दे।
अगर चिराग है तो जल तू आँधियों के सामने।

अगर नसीब है तो फिर तू मुफलिसी का साथ दे,
यकीन है अगर कहीं तो आदमी का साथ दे,
अगर तू दायरा है तो पतन के पाँव रोक दे।
अगर चिराग है तो जल तू आँधियों के सामने।