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ग़ज़ल

तुम कभी इसके, कभी उसके, कभी उसके हुए।
सोचता हूँ जिंदगी भर तुम भला किसके हुए।

वो मेरे नगमे चुराकर महफिलों में छा गया,
मेरे हिस्से में रहे अहसास कुछ सिसके हुए।

करवटें लेते रहे हम, ख्वाब भी आये नहीं,
हाथ आये नींद के टुकड़े कई खिसके हुए।

माँ ने बोला था कि बेटा उसको तो मत भूलना,
जिसकी चाहत के दुपट्टे में बंधे, जिसके हुए।

उसने मेरी दर्द में डूबी कहानी यूँ सुनी,
जैसे वो कोई कहानी ना हुई, चस्के हुए।

टिप्पणियाँ

  1. वो मेरे नगमे चुराकर महफिलों में छा गया,
    मेरे हिस्से में रहे अहसास कुछ सिसके हुए।

    करवटें लेते रहे हम, ख्वाब भी आये नहीं,
    हाथ आये नींद के टुकड़े कई खिसके हुए।
    बहुत लाजवाब गज़ल है। वाकई कमाल कर दिया । ये दो शेर तो दिल को छू गये।

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प्यार के दोहे

प्यार युद्ध, हिंसा नहीं, प्यार नहीं हथियार,
प्यार के आगे झुक गईं, कितनी ही सरकार।

प्यार कृष्ण का रूप है, जिसे भजें रसखान,
प्यार जिसे मिल जाये वो, बन जाये इंसान।

प्यार हृदय की पीर है, प्यार नयन का नीर,
ढाई आखर प्यार है, कह गए संत कबीर।

प्यार न समझे छल-कपट, चोरी, झूठ या लूट,
प्यार पवित्र रिश्ता अमर, जिसकी डोर अटूट।

प्यार में ओझल चेतना, प्यार में गायब चैन,
प्यार अश्रु अविरल-विकल, जिसमें भीगें नैन।

ग़ज़ल

ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये।
अहसास को अल्फाज़ के सांचे में ढालिये।।

जलता रहे जो रोज़ ही नफ़रत की आग में,
ऐसा दिलो दिमाग़ में रिश्ता न पालिये।।

दीवार रच रही है बांटने की साजिशें,
उठिये कि घर संभालिये, आंगन संभालिये।।

सोया है गहरी नींद में बहरा ये आसमां,
तो चीखिये, आवाज़ के पत्थर उछालिये।।

फाक़ाकशी में भूख लगी तो यही किया,
हमने ये अश्क पी लिये, ये ग़म ही खा लिये।।

- चेतन आनंद

मुक्तक

यूँ भी हुए तमाशे सौ।
पाया एक, तलाशे सौ।
जब भी उसका नाम लिया,
मुंह में घुले बताशे सौ।

यूँ समझो था ख्वाब सुनहरा याद रहा।
मुझे सफ़र में तेरा चेहरा याद रहा।
कैसे कह दूँ तेरी याद नहीं आई,
रस्ते भर खुशबु का पहरा याद रहा.