बुधवार, 23 दिसंबर 2009

ग़ज़ल

वक़्त चुपके से मेरे दिल की कहानी लिख गया।
मेरी सूनी आँखों में दरिया का पानी लिख गया।

ये उसी का ही असर था, जो किताबे जीस्त के-
हर सफे पे उसकी ही यादें पुरानी लिख गया।

आंसुओं को अब चुकाना ही पड़ेगा, क्योंकि दिल-
अब तलक जो क़र्ज़ था, सारा ज़बानी लिख गया।

कौन था वो, जो मेरे दिल को समंदर कह गया,
और आँखें, आंसुओं की राजधानी लिख गया।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर गज़ल है। हर एक शेर लाजवाब। बधाई

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  2. thanx, apki rachnaen bhi main padh raha hoon. baad main tippani karoonga.

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  3. सुन्दर है ग़ज़ल , गाने में और अच्छी बन पड़ेगी

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